नरसिंहपुर

प्रत्याशियों को आईडिया हो गया है कि जीत हार का अंतर क्या रहेगा

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नरसिंहपुर-  विधानसभा चुनाव की जब तक  मतगणना शुरु न हो जाये  और रिजल्ट सामने नहीं आते है, जब तक प्रत्याशियों की नींद उड़ी ही रहेगी, वे अपने खास समर्थकों के साथ बैठकर बूथ स्तर पर पड़े मतों का आंकलन करते हुए जीत-हार का अनुमान लगा रहे है, इस अनुमान में कई समर्थकों को भी पसीने आ रहे है, जो अपनी जिम्मेदारी वाले बूथों से जीत दिलाने का दावा कर रहे है. कहा जा रहा है प्रत्याशियों को इतना तो आईडिया हो गया है कि जीत हार का अंतर क्या रहेगा, यहां तक कि कुछ ने बूथ के अनुसार पड़े मतों पर अपनी हालत का अंदाजा तक लगा लिया है.

बताया जाता है कि जनसंपर्क से लेकर मतदान के दिन 28 नवम्बर तक प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के साथ जी-तोड़ मेहनत कर मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट डलवाने के लिए आग्रह अनुग्रह किया, इसमें कितनी सफलता मिली है कितनी नहीं इस बात का पता तो 11 नवम्बर को ही पता चलेगा, लेकिन प्रत्याशी इस दिन के आने के पहले अपने अपने गणित बिठाकर जीत-हार के अंतर का जरुर पता करने की कोशिश कर रहे है. इसके लिए प्रत्याशियों ने बूथ स्तर पर पड़े वोटों की सूची तक बुलवा ली है, जिसके आधार पर यह जानकारी हासिल कर रहे है किस वार्ड के किस बूथ में कितने वोट पड़े है, इसमें महिला कितनी है पुरुष कितने है, इस आधार पर वे अपने जीत हार का गणित बिठा लेगें, इसके लिए प्रत्याशियों के जानकारों की फौज लगी हुई है, इतना ही नहीं वे इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे है, किस बूथ में कितनी मेहनत की है कितनी नहीं, उसी आधार पर वोट पड़े है.

प्रत्याशियों के बूथ स्तर पर किए जा रहे आंकलन कितने सटीक बैठते है कितने नहीं यह तो आने वाली तारीख 11 नवम्बर को ही पता चल सकेगा, लेकिन यह बात भी सच है कि बूथ स्तर पर डाले गए वोट को लेकर उन समर्थकों को भी पसीने आ रहे है, जिन्होने बड़े बड़े दावे कर प्रत्याशियों के सामने वोट डलवाने की बात कही थी. क्योंकि बूथ स्तर पर डले वोट समर्थकों द्वारा किए गए कार्यो का कच्चा चिट्ठा खोलने के लिए भी काफी होगें. गौरतलब है कि हर बार चुनाव में किसी पक्ष को ज्यादा तव्वजों देना भी प्रत्याशियों को नुकसान में डाल सकता है,

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