नरसिंहपुर

सरपंच मोना कौरव ने चेन्नई में बताया स्मार्ट विलेज कैसे बना मेरा गाँव

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नरसिंहपुर–   देशभर से उन छह सरंपचों को आमंत्रित किया गया था जिन्होंने पंचायती राज व्यवस्था में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। पंचायती राज व्यवस्था पर काम करने वाले मिशन समृद्धि के सातवें सम्मेलन में प्रदेश एंवं नरसिंहपुर जिले  की सबसे युवा सरपंच मोना कौरव को सम्मानित किया गया।  इस मौके पर मोना ने गांव में किए काम के बारे में बताया। मोना ने बताया कि साढ़े तीन साल में पंचायत में चार करोड़ रुपए के काम और रूढ़िवादी सोच को खत्म करना बड़ी उपलब्धि है। मोना ने सम्मेलन में बताया कि मैं मप्र के नरसिंहपुर जिले के ऐसे गांव की सरपंच हूँ जहां लड़कियां आठवीं से आगे नहीं पढ़ती थीं । उनकी शादी कर दी जाती थी।  मेरे मामा ने साथ दिया। मैंने ने बीएससी, एमएससी और कानून की डिग्री भोपाल से की। मैंने सबसे पहले गांव की रुढ़ीवादी व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की। अपनी शिक्षा के साथ ही उस गांव और जिले की शिक्षा व्यवस्था में भी योगदान किया। अब मेरे गांव की बेटियां बीएससी, एमएससी से लेकर पीएचडी तक पढ़ाई कर रही हैं। मोना के मुताबिक उन्होंने पहले शासकीय योजनाओं पर काम किया। कुपोषित बच्चों को गोद लिया। गांव के लोगों की मदद से  तीन महीनों में कुपोषण मुक्त पंचायत बनाया। गांव में 4-5 महीने में शौचालय बनाए। स्मार्ट एजुकेशन सपना था। स्कूलों की व्यवस्था सुदृढ़ की। सरकारी स्कूल में बेसिक, पंचायत भवन नहीं था, जर्जर आंगनवाड़ी, सकूल थे। स्कूलों की बिल्डिंग में, जिम है, लाइब्रेरी है। स्मार्ट आंगनवाड़ी है। काम चल रहा है। ई-पेमेंट व्यवस्था है। मोना ने आयोजकों से अपील की कि ग्रामीण जनप्रतिनिधियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने के लिए ऐसे आयोजन चेन्नई, मुंबई जैसे शहरों में नहीं बल्कि गांवों में किए जाएं। इससे अपने गांवों के विकास का सपना संजोए लोगों को लाभ मिलेगा।

 

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