नरसिंहपुर

प्रतिबंध के बाद हो रहा रेत खनन

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नरसिंहपुर – रसूखदारों की मनमानी के चलते और प्रशासनिक उदासीनता आसपास के क्षेत्रों से बेधड़क रेत और मिट्टी का खनन किया जा रहा है। खनन उपरांत अवैध परिवहन के लिए दिन-रात निकलते ट्रैक्टर-ट्राली और डंपरों की आवाजाही से ग्राम की शांति भंग हो रही है। साथ ही ग्राम की सड़कें भी जर्जर हो गई है। जिसके कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी है और जर्जर सड़क से आवागमन करने में लोगों को परेशानी भी होती है। प्रशासन द्वारा रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है, तहसील करेली के अंतर्गत आने वाले ग्राम में रातीकरार, रांकई, बरमान, सासबहू नयाखेड़ा में अवैध उत्खनन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।  इसके बाबजूद क्षेत्र के सगुन घाट और बरमान से रात्रि के समय रेत खनन किया जा रहा है। खननकर्ता नाव की सहायता से नदी की बीच धार से रेत को लाकर घाट पर स्टाक करके रखते है, उसके बाद रात्रि के समय ट्रैक्टर, डंपर में यह रेत भर बेची जाती है। इस प्रकार प्रशासनिक उदासीनता के चलते प्रतिबंध के बावजूद दिन-रात का खनन और परिवहन चलता रहता है। लेकिन अवैध कारोबार पर नकेल कसने में प्रशासन बौना साबित हो रहा है। क्षेत्र के ग्राम रांकई, सासबहू और नयाखेड़ा में सरकारी जमीन को लगातार खोदकर लाई जा रही है और इस मिट्टी का उपयोग ईंट भट्टी संचालकों और कॉलोइनाइजरों द्वारा किया जा रहा है। ईंट भट्टी संचालक इस मिट्टी से ईंट बनाते हैं। वहीं कॉलोइनाइजर इस मिट्टी का उपयोग कॉलोनी की सड़कें बनाने में करते हैं। इस प्रकार सरकारी मिट्टी से रसूखदार मोटा मुनाफा कमाते हैं और प्रशासन अपनी आंखे मूंदें हुए हैं। क्षेत्र के जिन गांवों से मिट्टी और रेत का खनन किया जा रहा है। खननकर्ता द्वारा मिट्टी और रेत लाने के लिए उन जगहों पर दिन-रात ट्रैक्टर और डंपरों को भेजा जाता है, जिससे डंपरों जैसे भारी वाहनों के परिवहन से ग्राम की सड़क टूट-फूट गई है। क्योंकि गांव की सड़कें कितने भारी वाहनों के परिवहन के लिए नहीं बनाई जाती है। ग्रामीणों का कहना है, दिनरात डंपरों की आवाजाही से गांव की सड़कें पूर्णतः जर्जर हो गई है, जिसकी शिकायत प्रशासन से कई बार की जा चुकी है, परंतु भारी वाहनों की रोकथाम के लिए प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। क्षेत्र में चल रहे खनने के संबंध में जब भी खनिज विभाग से बात की जाती है, तो उनका वहीं ढुलमुल रवैया सामने आता है। विभाग यही कहता रहता है कि हमारे पास स्टाफ की कमी है और जहां भी खनन की शिकायत मिलती है, वहां कार्रवाई की जाती है। साथ ही खनन की शिकायत राजस्व विभाग और जनपद विभाग में करने की बात विभाग द्वारा की जाती है। इन सब बातों से साफ तौर पर विभाग की उदासीनता साबित होती है।

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