छतरपुर

जैविक खेती और आत्मा योजना ने धीरेन्द्र की फसलों को लहलहाया “सफलता की कहानी” –

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छतरपुर | 22-फरवरी-2018 कृषि जोत का घटता आकार, सूखे की मार ने किसानों की फसलों का उत्पादन सीमित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके अलावा छिटकवा विधि (परम्परागत तरीके) से खेती करना और भी कठिन हो रहा है, क्योंकि इसमें किसान को मनचाहा लाभ नहीं मिल पाता है। छतरपुर जिले के विकासखण्ड बिजावर के ग्राम पनागर निवासी श्री धीरेन्द्र चौरसिया इसी तरीके से जीवन निर्वहन कर रहे थे। एक हेक्टेयर जमीन में वह सोयाबीन, गेहूं एवं उड़द की खेती परम्परागत तरीके से करते थे, किंतु उतना लाभ नहीं मिल पाता था।

इससे उबरने के लिए उन्होंने कृषि विभाग के आत्मा योजना के अंतर्गत तकनीकी प्रबंधक श्री अभिलाष पटेल से सम्पर्क कर विभाग से जानकारी ली। उन्होंने जैविक खेती एवं नगदी फसलों के उत्पादन करने की जानकारी दी। नवाचार के अंतर्गत अरहर की धारवाड़ पद्धति की जानकारी मिली। उन्होंने एक एकड़ भूमि में 1 किलो बीज की नर्सरी पॉलिथीन डाली। नर्सरी तैयार होने पर 3 फिट पौधे की बीच की दूरी एवं 5 फीट की लाईन की दूरी रखी। गड्ढ़ों में पौधे रोपकर उन्हें पूर्व उत्पादन से 300 गुना अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसमें धीरेन्द्र को लगभग 60 हजार रूपए का लाभ हुआ। धीरेन्द्र बताते हैं कि वे खरीफ में मूंगफली एवं रबी में मटर की अंतरवर्ती फसल लेते हैं। कृषि विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि भविष्य में भी वे इस तरह से खेती करते रहेंगे। जैविक खेती के इस प्रयोग से वह आत्मनिर्भर महसूस कर रहे हैं तथा शासन की इस योजना के लिए वह धन्यवाद देते हैं।

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