नरसिंहपुर

किसानों को प्रधानमंत्री के संबोधन का हुआ जिले में सीधा प्रसारण

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नरसिंहपुर, 17 मार्च 2018. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- पूसा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि उन्नति मेला से वेब- टेलीकाÏस्टग के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि क्षेत्र के लोगों को संबोधित किया। इसका एलईडी पर सीधा प्रसारण स्टेशनगंज नरसिंहपुर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में किया गया। इस प्रसारण को बड़ी संख्या में जिले के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक देखा और सुना।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषक संगोष्ठी का आयोजन प्रदेश के आयुष, कुटीर एवं ग्रामोद्योग (स्वतंत्र प्रभार) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटैल के मुख्य आतिथ्य में किया गया। संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने खेती की आधुनिक तकनीकों और जैविक खेती के बारे में जानकारी दी। किसानों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का जबाव दिया और उनकी शंकाओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
युवा कृषि के क्षेत्र में आगे आयें- राज्य मंत्री श्री पटैल
कृषक संगोष्ठी में राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटैल ने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान है। कृषि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। हमारे किसान ऋतु के अनुसार मौसम आधारित खेती करते हैं। खेती एक तरह से परोपकार का काम है। खेती को लाभदायक बनाने के लिए हमें रसायन और कीटनाशक के स्थान पर जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा। युवाओं में खेती के प्रति रूचि बढ़ानी होगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे कृषि के क्षेत्र में आगे आयें। जिले में कृषि आधारित उद्यम स्थापित करें, इसके माध्यम से अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर मुहैया करायें। कृषि उद्यम स्थापना में सहायता के लिए राज्य शासन विभिन्न योजनायें संचालित कर रही है। युवा इन योजनाओं का लाभ लें।
श्री पटैल ने कहा कि खेती को लाभदायक बनाने के लिए जिले के किसानों ने अनेक कार्य किये हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाई है। उन्होंने कहा कि किसान मधुमक्खी पालन और बांस की खेती पर भी ध्यान दें। मधुमक्खी पालन से शहद तो प्राप्त होगी ही। साथ ही मधुमक्खी के माध्यम से होने वाले परागण के कारण फसलों की उत्पादकता भी बढ़ेगी और पर्यावरण बेहतर होगा।
डॉ. एसकेएस यादव ने शिवयोग पद्धति से खेती करने पर बल दिया और इसका तरीका बताया। उन्होंने फसलों में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग करने के दुष्परिणाम बताये। उन्होंने बताया कि शिवयोग पद्धति से खेती करने में लागत कम और उत्पादन ज्यादा मिलता है।
इस अवसर पर यशवंत सिंह जूदेव, प्रगतिशील कृषक नारायण सिंह पटैल, उत्तम सिंह पटैल, सरदार सिंह पटैल, राजीव ठाकुर, धनीराम पटैल, रामजी पटैल, बंटी सलूजा, एसडीएम राजेन्द्र राय, प्रभारी उप संचालक कृषि अर्चना परते, सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी डॉ. आरएन पटैल, रजनी प्रभाकोरी, असीम चौरसिया और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. यतिराज खरे व डॉ. एसआर शर्मा ने किया।

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